image इश्क़ है दर्द, इश्क़ है दुआ

है तक़दीर से पूछा इतना प्यार क्यों दिया मेरे दिल में;

कि एक से मोहब्बत किया दिल से और एक को चाहा दिल की धड़कनो से;

ना रह सकती दिल के बग़ैर, ना जुड़ाहो सकती अपनी धड़कनो से;

ये क़यामत का कैसा खेल है;

जान है जा रही, दूर मेरी जिस्म से।

 

ऐ मौला अब तू ही बता;

मोहब्बत से इंसान क्यों ना डरे।

सब कहते है इश्क़ है ताक़त, इश्क़ है दुआ

लेकिन वो इश्क़ ही क्या जिससे हम दो पल जी ना सके ।।

Hindi-Urdu poem 1 Sept, 2017

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